शनिवार, 1 सितंबर 2012

अकेले आदमी का नाच

                                     Artist - Myself




















एक आदमी उठता है
कहीं बहुत दूर चले जाने के लिए
और अपने कमरे में ही
गोल - गोल चक्कर काटता है
फिर थककर बैठ जाता है बिस्तर पर
जैसे बहुत दूर निकल आया हो
और थोड़ी देर को सुस्ताने बैठा हो
उठकर फिर चलना शुरू करता है
कि अभी और दूर जाना है.

एक आदमी जो
अपने कमरे से निकलकर
अपने ही कमरे में लौट आता है
और बीच में
जाने
कितने पहाड़
कितने जंगल
जितने लोग
उतने चेहरे  
कितने शहर
कितनी नदियाँ
उतने ही दिन
जितनी रातें  
पार कर आता है
हार कर आता है.

एक आदमी उठता है
और फिर सो जाता है.

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