बुधवार, 11 जनवरी 2012

सरई ,सागौन और महुआ के पेड़ों से लकदक


                                          Screen shot - In the mood for love 














तुम्हारे बारे में सोचते हुए
मै अपने बारे में सोचने लगता हूँ
तुम अभी क्या कर रही होगी
की सोच
मै अभी क्या करूँ
की धुन पर टूटता है
तुम नहीं होकर कैनवास में बदल जाती हो
और मै हूँ
कहते हुए रंग साकार होने लगते हैं
अक्सर ही तुम पर लिखूं
सोचते हुए
मै तुम्हे भूल जाता हूँ
और लिखता हूँ
धूप, नदी और जंगल
और उदासी.
कई बार तुम्हे सोचते हुए
मै बहुत दूर तक निकल जाता हूँ
कुरुवार ,नगोई, और बिटकुली तक घूम आता हूँ
अजीब है ये
की तुम हो और नहीं हो के बीच
ढेर सारे लम्पट से लगते दुःख हैं
और डब-डब सी रातें हैं
तुम हो और नहीं हो के बीच
मै है फैला हुआ
नींद से भरपूर
नीले जंगल की तरह
सरई ,सागौन और महुआ के पेड़ों से लकदक
महकता ,गमकता
और सांय-सांय करता हुआ.

कुरुवार,नगोई,बिटकुली मेरे गांव के आस पास के गाँवों के नाम 

1 टिप्पणी:

  1. डर लगता था किसी का होने मै आज मैं जहाँ का हो गया हूँ

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